जोधपुर में श्री आईमाता मन्दिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर धर्मरथ भैल एवं परम श्रद्धेय धर्मगुरु दीवान साहब को विधी विधान से नारियल देकर किया सादर निमंत्रित

अत्यंत हर्ष के साथ सादर निवेदन है कि गत मिटिंग में लिए गये निर्णय के अनुसार दिनांक 15.11.2025 शनिवार मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष एकादशी को धर्मरथ भैल व परम श्रद्धेय धर्मगुरु दीवान माधवसिंह जी साहब का भव्य बधावा तथा दिनांक 16.11.2025 रविवार मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष द्वादशी को अभिजीत वेला में श्री आईमाता मन्दिर का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव धूम धाम से आयोजित होगा।

 

दिनांक 31.03.2025 चैत्र सुदी बीज के शुभ अवसर पर सीरवी समाज जोधपुर व श्री आईमाता सीरवी सेवा संस्थान जोधपुर की प्रबन्ध कार्यकारिणी (अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष एवं सदस्य) मय समन्वयक, संरक्षक एवं वरिष्ट नागरिक तथा समाज सेवी समाज बन्धु श्री आईमाता मन्दिर बिलाड़ा धाम उपस्थित हुए।

 

श्री आईमाता जी के जयकारे के साथ ही परम श्रद्धेय धर्मगुरुजी दीवान साहब को साफा व माला पहना कर अभिनंदन किया व तत्पश्चात जोधपुर में निर्मित श्री आईमाता मन्दिर के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभ अवसर पर धर्मरथ भैल व परम श्रद्धेय दीवान साहब को रिद्धी सिद्धी सहित पधारने हेतु परम्परानुसार विधि विधान से नारियल देकर सादर निमंत्रित किया।

 

धर्मगुरु दीवान साहब नें निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार कर सभी को शुभ आशीष देते हुए फरमाया कि आप सभी अपनी पुरोधाओं की परम्परा के अनुसार अपनी आन बान व शान साफा पहनकर सुसंघठित परम्परा बनाये रखते हुए नारियल एवं प्रसाद लेकर माताजी के दरबार में उपस्थित हुए है, माताजी प्रसन्न होकर जोधपुर शहर जरुर पधारेंगे व केशर ज्योत प्रकाशमान होगी।

 

दीवान साहब नें प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर किये जाने वाले प्रबन्धन के बारे में जानकारी ली तथा विभिन्न बिन्दुओं पर मार्गदर्शन दिया।

 

भामाशाह सम्मान के क्रम में फरमाया कि किसी भी योगदान में सम्बन्धित भामाशाह के पुरे परिवार की (पुरुष मुख्या के साथ महिलाओं एवं बाल बच्चो की भी) संयुक्त भागीदारी होती है इसलिए विशिष्ठ भामाशाह सम्मान के दौरान सम्बन्धित भामाशाह को सपरिवार मंच पर सादर आमन्त्रित कर परिवार के सभी सदस्यों को संयुक्त रुप से सम्मानित किया जाना चाहिए।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान अपने स्वजातिय बन्धुओं, माताओं बहनों द्वारा धार्मिक भावनाओं से युक्त सुसंस्कृत प्रस्तुतियां प्रस्तुत करने तथा विशिष्ठ अतिथि / भामाशाहों के सम्मान हेतु धर्म रथ भैल वाला साउण्ड युक्त मोमेन्टो प्रदान कर सम्मानित करने हेतु फरमाया जिससे नित्य प्रतिदिन भैल के दर्शन के साथ उसमें लगे साउण्ड के माध्यम से अपने-अपने घरों में सुबह-सांय नियमित दैनिक आरती के समय गायन से माताजी की आरती एवं 11 नियमों इत्यादि के बारे में अपने बाल गोपालों को भी अपने धर्म के प्रति जानकारी हो, जिससे शिक्षा के साथ धार्मिक संस्कारों के प्रति भी प्रेरित होकर आने वाली पीढी शिक्षित एवं सुसंस्कृत बन सके।

 

समाज में शिक्षा विकास को लेकर भी चर्चा हुई। जोधपुर शहर के बासनी मधुबन में लगभग तीन दशक पूर्व छात्रो हेतु सीरवी छात्रावास स्थापित हुआ। इस शिक्षा मन्दिर से असंख्य जरुरतमंद विद्यार्थीयों ने अध्ययन सुविधाओं का लाभ लेकर अपने जीवन को संवारा है। सामाजिक जीवन में शिक्षा के साथ ही उन्नत संस्कार भी आवश्यक है इस हेतु छात्रावास के निर्माण के तत्पश्चात से ही जोधपुर वासियों की जोधपुर में श्री आईमाता के मन्दिर के निर्माण की मांग अपेक्षित रही है, जो माँ आईजी की असीम कृपा से अब साकार होने जा रही है।

धर्मगुरु दीवान साहब नें फरमाया कि जोधपुर वासियों नें इस आईमाता मन्दिर में देवालय के साथ ही अतिथि विश्राम गृह, मानवीय सेवार्थ के क्रम में भोजनशाला एवं शिक्षा को बढावा देने हेतु लाईब्रेरी तथा कोचिंग सेन्टर इत्यादि का निर्माण करवाकर धर्म एवं शिक्षा तथा मानवीय सेवार्थ के क्रम में अतिसराहनीय कार्य किया है। महिला शिक्षा को बढावा देने के क्रम में कोचिंग सेन्टर परिसर में महिला छात्रावास संचालित करने का विचाराधीन प्रावधान भी बेहतरीन विचार है। समाज में महिला छात्रावास भी होना चाहिए।

 

दीवान साहब ने फरमाया कि जिस उद्देश्य से सेवा हेतु सभी संकल्बद्ध हुए है तथा जिस स्वरुप में भवन निर्मित हुआ है वो नियमित रुप से सुसंचालित होने पर उपयोग की दृष्टी से उक्त बडेर एक मॉडल के रुप में स्थापित होगा।

पावन पुण्य उद्देश्य के मध्य नजर जोधपुर के स्थानीय योगदाताओं के साथ ही विशेषतः प्रवास में व्यवसायरत विभिन्न राज्यों- कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आन्ध्रप्रदेश एवं गुजरात इत्यादि राज्यो की संस्थाओं / भामाशाहो नें भी जोधपुर के उक्त सामाजिक भवन निर्माण में निस्वार्थ एवं उन्मुख भाव से चिरस्मरणीय योगदान दिया है।

धर्मगुरु दीवान ने समस्त योगदानदाताओं व कार्यकर्ताओं को शुभ आशीष देते हुए फरमाया कि सभी के सहयोग से भूमि विस्तार के साथ समाज विकास की टांकी हमेशा बजती रहेगी, शिक्षा एवं संस्कारों के भवन निर्माण से सुसंघठित एवं सुसंस्कृत समाज का निर्माण होगा। माताजी की असीम कृपा से सभी योगदानदाताओं के समस्त प्रकार के प्रतिष्ठान, उद्योग, सरकारी सेवा प्रगति के साथ ही अपना मूल कार्य कृषि क्षेत्र में भी रिद्धी सिद्धी सहित खूब प्रगति मिलेगी। सभी पर श्री आईमाता जी का आशिर्वाद हमेशा बना रहेगा।

 

धर्मरथ भैल व परम श्रद्धेय धर्मगुरु दीवान साहब को नारियल देकर सादर निमन्त्रण देने के दौरान बाबा मण्डली की ओर से श्री पोकर महाराज के साथ ही “अखिल भारतीय सीरवी महासभा राजस्थान” के प्रान्तीय एवं बिलाड़ा परगना अध्यक्ष- श्री धन्नाराम जी लालावत, सीरवी समाज परगना समिति जैतारण के अध्यक्ष- श्री हणुतराम जी बर्फा व सीरवी समाज बिलाड़ा के कोटवाल- श्री प्रेमसिंह हाम्बड़ साहब भी सादर उपस्थित हुए।

 

धर्मरथ भैल एवं धर्मगुरु दीवान साहब को निमन्त्रण हेतु सीरवी समाज जोधपुर एवं श्री आईमाता सीरवी सेवा संस्थान जोधपुर की प्रबन्ध कार्यकारिणी मय समन्वयक, संरक्षक एवं वरिष्ट नागरिक तथा निम्नलिखित समाज सेवी बन्धु सादर उपस्थित हुएः-

——————————————-

(1) श्री पन्नालाल जी हाम्बड़

(2) श्री चैनसिंह जी गहलोत

(3) श्री रतनलाल जी लेरचा

(4) श्री मेघाराम जी सेणचा

(5) श्री गोपाराम जी काग

(6) श्री जयराम जी लालावत

(7) श्री खेमाराम जी जांजावत

(8) श्री मांगीलाल जी लेरचा

(9) श्री सुजानसिंह जी बर्फा

(10) श्री नारायणराम जी हाम्बड़

(11) श्री रतनलाल जी हाम्बड़

(12) श्री लक्ष्मणसिंह जी बर्फा

(13) श्री मोहनलाल जी काग

(14) श्री पन्नालाल जी जांजावत

(15) श्री चतुराराम जी लालावत

(16) श्री गोविन्दराम जी मेरावत

(17) श्री दुर्गाराम जी जांजावत

(18) श्री गोपाराम जी राठौड़

(19) श्री जगदीश जी गारिया

(20) श्री गोपीलाल जी सिंदड़ा

(21) श्री किशोर जी गारिया

(22) श्री अणदाराम जी पंवार

(23) श्री देवांग सीरवी गारिया

(24) श्री माधुराम जी चोयल

(25) श्री ओमप्रकाश पंवार

 

सादर 🙏🙏

श्री आई माता की जय, धर्मरथ भैल की जय, धर्मगुरु दीवान साहब की जय एवं अपने-अपने मात-पिता गुरुदेव की जय

https://www.facebook.com/share/p/153jb7bkpu/

Recent Posts